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ऐ चाँद तुझसे शिकायत है लाख मेरी मगर | नेहा नूपुर

आज प्रस्तुत है आप सबके बीच मेरी एक कविता। आके स्नेह की आकांक्षी … ऐ चाँद तुझसे शिकायत है लाख मेरी मगरपुतलियों से नींद ले, […]

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आज़ादी का ये वो दिन है जो हम अपनी-अपनी हदों में रहकर मना रहे हैं

जय हिंद! अद्भुत दिन था ये! जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी तब सभी कहने लगे थे कि ऐसा लगता है बचपन की तरफ लौट […]

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बिहार में बाढ़ है तो बिहार में ही बहार भी है!

नमस्कार! हम बिहारी हैं भाई साहब! वही बिहारी जिसके बारे में सोचते ही आपका ही नहीं, नेताओं का मन भी “कइसन-कइसन” हो जाता है। वही […]

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